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हथकरघे के वस्त्र क्यों?

मित्रों,

आज हमारे सामने जो ज्वलंत समस्याएँ हैं वह हैं प्रदुषण, ईंधन की कमी ,  बेरोजगारी और बढ़ती बीमारियां ।

प्रदुषण और ईंधन की कमी का मुख्य कारण है तेजी से बढ़ते कारखाने जहाँ मशीनों को चलाने के लिए प्रतिदिन लाखों  टन ईंधन की खपत होती है । भारत को अरब देशों से कच्चा तेल आयात करना पड़ता है और उसके बदले में भारत उन देशों को गाय , बैल आदि का मांस निर्यात करता है । उन कारखानों से निकलने वाला धुआं वायु प्रदुषण और रासायनिक कचरा नदियों के जल को प्रदूषित करता है । हम आम नागरिक सोचते हैं कि फैक्ट्री लगाने वाला इसके लिए ज़िम्मेदार है किन्तु कारखानों में बनी हुई वस्तुओं , वस्त्रों का उपयोग करने वाले हम ही इसके लिए सीधे सीधे ज़िम्मेदार हैं । यदि हम कारखानों में बने वस्त्रों का उपयोग ही न करें तो ऊर्जा और प्रदुषण दोनों की ही समस्या का समाधान हो सकता है ।

अब आपके मन में प्रश्न आयेगा कि यदि कारखाने बंद हो गए तो बहुत से लोग बेरोजगार हो जाएंगे । तो मित्रों यदि आप गहराई से सोचे तो आप पाएंगे कि असल में बेरोजगार तो लोग कारखानों के लगने से हुए थे । जिस काम के द्वारा पहले दस लोग अपनी आजीविका निर्वाह करते थे आज उनका स्थान एक मशीन ने ले लिया और जो पैसा पहले १० लोगों में वितरित होता था उसका मालिक सिर्फ वह एक व्यक्ति बन गया जिसकी वह मशीन है और ऐसी कई मशीने जिसके पास हैं वह बन गया बड़ा उद्योगपति और उन मशीनों को चलाने वाले बाकी सभी लोग उसके नीचे काम करने वाले नौकर ।

यदि कपडा निर्माण पर हम इन तथ्यों को घटाने की कोशिश करें तो हम पाएंगे कि पहले हथकरघे के द्वारा हमारे देश में कपडा निर्माण होता था और हर करघा चलाने वाला अपना कपडा उचित मूल्य में बेचता था । उसकी मेहनत का सारा मूल्य उसे ही  मिलता था । किन्तु कपडा बनाने की मशीनों के आने से उनमे से अधिकतर लोग बेरोजगार हो गए और कुछ लोग उद्योगपतियों के गुलाम हो गए ।  और आगे चलकर कपास और अन्य प्राकृतिक साधनो के बजाय कई रासायनिक प्रक्रियाओं से निर्मित वस्त्रों का उपयोग भी किया जाने लगा जो हमारी त्वचा , हमारे स्वास्थय के लिए अत्यंत हानिकारक हो गया ।

अब आप के मन में प्रश्न होगा कि इस समस्या का  समाधान क्या हो सकता है ।
आज भी इस समस्या का समाधान हम कर सकते हैं ।
आवश्यकता है हस्त निर्मित वस्तुओं को अपनाने की । सभी वस्तुएं यदि हम हस्त निर्मित न भी अपना सकें तो कम से कम वस्त्र तो अपना ही सकते हैं ।
हथकरघे से निर्मित वस्त्रों के लाभ :
१) पर्यावरण सुरक्षा
२) वस्त्र निर्माता (कारीगर) को उसका पूरा हिस्सा
३) स्वरोजगार , स्वावलंबन
४) प्राकृतिक फैब्रिक – कपास , बांस आदि से निर्मित
५) स्वास्थ्य लाभ
तो आइये हम सभी हथकरघे के वस्त्र अपनाएँ और अपने देश को खुशहाल बनाये ।
भारत में बनाये , भारत को बनायें ।

हमारे कारीगरों ने अपने हाथों से सुन्दर सुन्दर वस्त्र  बनाये हैं । जिनमे साड़ी , कुरता , पजामा , शर्ट , पैंट , टॉवल , बेडशीट , चादर , रुमाल  आदि कई (वैरायटी) विविधताओं में उपलब्ध हैं ।

इन्हें प्राप्त करने के लिए आप निम्न लिखित संपर्क सूत्र पर संपर्क कर सकते हैं:
info@ahimsazone.in पर आपके संपर्क सूत्र के साथ लिखे।
धन्यवाद् |