AhimsaZone अहिंसा क्षेत्र

हम वही है, जो हम खाते है

कुछ विख्यात अंग्रेजी websites पर लिखे गए लेख यहाँ प्रस्तुत है |
आपको आज कल ऐसे बहोत सारे लेख मिलेंगे | यह लेख खेतों में रासायनिक खाद और रासायनिक कीट नियंत्रक के उपयोग का एक भयावह दुष्परिणाम बताते है | संक्षिप्त में आपको अन्य दुष्परिणामों के विषय में बताते हैं |
१) रासायनिक खाद के निरन्तर उपयोग से मिटटी में प्राकृतिक रूप से उपस्थित जीवाश्म (केंचुए आदि) नष्ट हो जाते हैं जो मिटटी को उर्वरक बनाने का काम करते थे | इनके न होने से धीरे धीरे खेत बंजर होते जाते हैं | और अधिक रासायनिक खाद की मांग करते हैं | रासायनिक खाद से खेती में पानी बहुत  मात्रा में उपयोग करना पड़ता है |
२) ये रसायन मिटटी के माध्यम से भूमिगत जल में मिल जाते हैं और जल को प्रदूषित करते हैं  |
३) यही रसायन युक्त फसल (गेहूं ,  चावल , जवार आदि ) जब हम भोजन में उपयोग करते हैं तो ये रसायन हमारे शरीर में जाकर कैंसर जैसे घातक रोग उत्पन्न करते हैं |
४) इन्ही खेतों से उत्पन्न चारा पशुओं को खिलाया जाता है जो पशुओं में बीमारी का कारण बनता है और उनके दूध में भी वही रसायन मिल जाते हैं |
५) महंगे रासायनिक खाद एवं कीट नाशकों के लिए किसान पर खेती पर होने वाला व्यय का बोझ बढ़ता है और विदेशी कंपनियों के खाद आदि उपयोग करने से देश का पैसा विदेश में जाता है |
इसके विपरीत रसायन रहित खेती के निम्नलिखित लाभ होते हैं :
१) विभिन्न रसायन हमारी फ़ूड चेन में प्रवेश नहीं करते जिससे हम और हमारे पशु स्वस्थ रहते हैं |
२) जल एवं थल प्रदुषण से मुक्ति
३ ) मिटटी की उर्वरक क्षमता में क्रम क्रम से वृद्धि और इसके साथ ही अनाज उत्पन्न करने  की क्षमता में भी वृद्धि | आज से २ शताब्दी पूर्व भारत के खेतो में एक एकड़ में ५६ क्विंटल तक धान उत्पन्न होता था जो अब घटकर १८ क्विंटल तक आ गया है  | हमारे पूर्वज रसायनो का उपयोग नहीं करते थे |
३) कम पानी में भरपूर फसल | रसायन रहित फसल में पानी की आवश्यकता सीमित  रहती है जिससे सूखा ग्रस्त इलाकों में भी कुछ फसलों का उत्पादन किया जा सकता है |
४) गोबर की खाद, जीवामृत आदि के उपयोग से प्राकृतिक खेती करने के लिए किसान को किसी भी प्रकार की महँगी रासायनिक खाद , कीट नियंत्रक आदि खरीदने की आवश्यकता नहीं होती और खेती का बजट बहुत कम हो जाता है | सुभाष पालेकर जी की जीरो बजट नेचुरल फार्मिंग (ZBNF) की प्रक्रिया के तहत |
इसके चलते आज रसायन रहित खेती (organic farming ) के बारे में लोग जागरूक हो रहे है और बहुत से लोग  काम कर रहे है |  http://swadeshikheti.com/  जैसी कुछ websites तो बहुत अच्छी जानकारी परोस रहे है | AhimsaZone के द्रष्टिकोण से यह भी एक प्रकार से अहिंसा और भारतीयता की और सही कदम है |
तो आइये रसायन रहित अनाज का उपयोग कर हम अपने स्वास्थय को , पशुओं को , किसानो को एवं अपने देश को समृद्ध बनाने का प्रयास करें | अपनी देश की माटी को पुनर्जीवित करने का यदि कोई उपाय है तो वह है रसायन रहित अनाज का उपयोग एवं इनके उपयोग को प्रोत्साहन |
हम AhimsaZone के माध्यम से जल्दी ही रसायन रहित अनाज और वैसे अनाज से बने उत्पादनो को online उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहे है |  और इसके बारे में अधिक जानकारी जल्द ही प्रस्तुत करेंगे |